हमारा प्रतीक चिह्न
ओ३म् और कृण्वन्तो विश्वमार्यम् का गूढ़ अर्थ
हमारे गुरुकुल का प्रत्येक प्रतीक एक गहन भाव समेटे है। ये केवल चिह्न नहीं, हमारे आदर्शों की मूर्त अभिव्यक्ति हैं।
ओ३म् का अर्थ
ओ३म् (अ + उ + म्) परमात्मा का सर्वश्रेष्ठ और सर्वव्यापक नाम है। ये तीन अक्षर सृष्टि, स्थिति और प्रलय — तथा जागृत, स्वप्न और सुषुप्ति — तीनों अवस्थाओं के प्रतीक हैं। हर अध्ययन, हर यज्ञ, हर प्रार्थना का आरम्भ इसी पवित्र ध्वनि से होता है।
ध्येय-वाक्य
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
ऋग्वेद ९/६३/५
अर्थ: सम्पूर्ण विश्व को आर्य अर्थात् श्रेष्ठ बनाओ।
यह केवल एक राष्ट्र या जाति का नहीं, समस्त मानवता को श्रेष्ठता की ओर ले जाने का सार्वभौम संकल्प है।
आदर्श-मूल्य
यज्ञ
त्याग, पवित्रता और सामूहिक कल्याण का प्रतीक।
दीप
ज्ञान का प्रकाश जो अज्ञान के अंधकार को मिटाता है।
स्वाध्याय
निरंतर आत्म-अध्ययन और आत्म-उन्नति।
तमसो मा ज्योतिर्गमय
हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।